आईये आपका परिचय घर की दीवारों से करवाते है,सूनी एवं बेरंगी दीवारें किसको अच्छी लगती है?किसी को भी नहीं। दीवारों के रंग आपस मे अपनी रंगों की भाषा में वार्तालाप करते हैं तभी तो कहते हैं दीवारे बोल उठेंगी।दीवारों को नवजीवन प्रदान करने हेतु उन पर चित्र का कागज, चित्रकारी करके, रंगीन सिरेमिक टाइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। लकडी के व्दारा भी दीवार को सुन्दर छवि प्रदान की जा सकती है। दीवारों को आकर्षक रूप देने हेतु हस्त चित्रकला भी की जाती है,उसके समकक्ष कागज पर बने चित्रो का प्रयोग कर दीवारों को आकर्षक बनाया जा सकता है। दीवारे रंगों से बात करतीहैं।जब घर की दीवारें अपने आकर्षक रूप का बखान करती है तो घर का वातावरण भी स्वत: मनमोहक हो जाता है।  दीवारो के साथ साथ रंगबिरंगे फूल,पेड.पौधे भी अपनी भीनी भीनी खुश्बू से दीवारों के साथ ही सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित और मनमोहक बना देते हैं।  दीवारें तो हमारी यादों को भी संजो कर रखती है,कैसे ?तस्वीरों के रूप में।यदि दीवार के रंगों के अनुरूप चित्रों के रंगों का चुनाव किया जाय तो दीवारें अवश्य बोलती हैं।

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